जब डा. कलाम बने थे कर्नल पृथ्वीराज 20 साल पहले आज ही के दिन हुआ था पोखरण परमाणु परीक्षण
11 मई 1998 आज से 20 साल भारत ने उस समय पूरी दुनिया को चौंका दिया था. जब राजस्थान के पोखरण में परमाणु परीक्षण किया. यह परीक्षण उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की अगुआई में अंजाम दिया गया था. परमाणु परीक्षण को करने में इतनी गोपनीयता बरती थी, कि दुनिया को इसकी कानोकान खबर तक नहीं लगी. इसके लिए कुछ कोडवर्ड भी इस्तेमाल किये गये थे.
अमेरीका के सूचना तंत्र को दिया चकमा
यह वह समय था जब अमेरिका के चार जासूसी उपग्रह 24 घंटे पूरी दूनिया की निगरानी करते थे जिन पर उस समय अमेरिका 27 अरब डॉलर प्रति वर्ष खर्च करता था. लेकिन भारत ने अमेरीका की सीआईए के इन खुफिया तंत्र को चकमा देकर 11 मई को परीक्षण किया.
डा. कलाम बने कर्नल पृथ्वीराज
इस प्रॉजेक्ट के साथ जुड़े वैज्ञानिक कुछ इस कदर सतर्कता बरत रहे थे कि वे एक दूसरे से भी कोड भाषा में बात करते थे और एक दूसरे को छद्म नामों से बुलाते थे. इसी क्रम में डा. कलाम को कर्नल पृथ्वीराज छद्म नाम दिया गया था. इसके अलावा कुछ कोडवर्ड नाम थे ताज महल, कुम्भकरण, व्हाइट हाउस आदि.
2 दिन के भीतर हुए 5 परीक्षण
11 और 13 मई, 1998 को राजस्थान के पोखरण परमाणु स्थल पर पांच परमाणु परीक्षण किये थे. यह दूसरा भारतीय परमाणु परीक्षण था. इससे पहले भारत ने पहला परीक्षण मई 1974 में किया गया था. इसका कोड नाम स्माइलिंग बुद्धा (मुस्कुराते बुद्ध) था. 11 मई को हुए परमाणु परीक्षण में 15 किलोटन का विखंडन (फिशन) उपकरण और 0.2 किलोटन का सहायक उपकरण शामिल था.
भारत की आर्थिक नाकेबंदी की
पोखरण परीक्षण के बाद दुनिया के शक्तिशाली देशों ने गुस्से में भारत की आर्थिक नाकेबंदी की। वे इसलिए और नाराज थे, क्योंकि भारत ने उनके विकसित सूचना तंत्र को नाकाम कर अपना सफल परीक्षण कर लिया था
हालांकि वाजपेयी ने यह भी कहा था कि हम पहले परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। जिन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, भारत उनके खिलाफ इन हथियारों का इस्तेमाल कभी नहीं करेगा।


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