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क्रिकेट के इतिहास का वह महान गेंदबाज जिसकी गेंद पर कोई भी बल्लेबाज नहीं लगा पाया छक्का


दुनिया टुडे । क्रिकेट की पहचान उसके अनोखे और रोचक रिकॉर्ड के लिये होती है. क्रिकेट के तारीख में गेंदबाजी से जुड़े ढेरो रिकॉर्ड दर्ज है. और ना जाने कितने ही ऐसे महान गेंदबाज पैदा हुए है जिन्होने अपनी पहचान अपनी बेहतरी गेंदबाजी के जरिये बनाई है. उन्हे में से एक ये गेंदबाज जिसके नाम दर्ज है ऐसा अनोखा रिकॉर्ड नाम है — कर्टली एम्ब्रोज.

क्रिकेट मैच में किसी भी गेंदबाज की गेंद पर छक्का लगना आम बात है. क्रिकेट के इतिहास में कितने ही ऐसे गेंदबाजो के नाम है जिन्होने अपनी रफ्तार से लेकर अपनी बेहरीन स्विंग और इनस्विंगर गेंदो से न केवल बल्लेबाजो में खौफ पैदा किया ​है बल्कि पवैलियन भी लौटाया है. लेकिन गेंदबाजो के बारे में एक कहावत है की बकरे की अम्मा कब खैर मनायेगी कभी कभी गेंदबाज को बल्लेबाज द्वारा छक्का खाना ही पड़ जाता है. लेकिन कर्टली एम्ब्रोज दुनिया के एकमात्र ऐसे गेंदबाज है जिन्होने लगभग 100 मैच खेलने के बाद भी छक्का नहीं खाया है.

21 सितम्बर 1963 को स्वेट्सअंगुआ में जन्में वेस्टइंडीज के कर्टली एम्ब्रोस को क्रिकेट जगत में सर कर्टली एम्ब्रोस के नाम से पहचाना जाता है.  6 फुट 7 इंच लम्बे एम्ब्रोस की गेंदे बल्लेबाजो के हमेशा ही चुनौती साबित हुई है. 1988 में पाकिस्तान के खिलाफ़ अपना टेस्ट डेब्यू करने वाले एम्ब्रोस ने अपने टेस्ट करियर में 98 मैच खेले है जिसमें उनके नाम 20.99 की औसत से 409 विकेट दर्ज है. लेकिन कमाल की बात यह है की 98 टेस्ट खेलने के बावजूद उन्होने एक भी छक्का नहीं खाया.

एम्ब्रोस की गेंद पर छक्का न लगने के पीछे एक खास वजह भी बताई जाती है. जिस कारण उनका रिकॉर्ड मौजूदा समय में तोड़ पाना बेहद ही मुश्किल काम होगा. दरअसल कर्टली एम्ब्रोज उस जमाने के गेंदबाज हैं जब बाउंसर गेंद फेकने की कोई सीमा नहीं होती थी. एम्ब्रोज इसी बात का फायदा उठाते थे. चूकिं उनकी लम्बाई 6 फुट 7 इंच थी इस्लिए ओवर में आसानी से 5 से 6 गेंदे बांउसर फेंक दिया करते थे.

एम्ब्रोस एक ऐसे गेंदबाज थे जो अपने जीवन काल में हमेशा आई सी सी रैंकिंग में पहले पायदान पर रहे है. उस दौर में उन्हे पछाड़ पाने वाला कोई और दुसरा गेंदबाज नहीं था. 98 टेस्ट मैचो में 409 विकेट चटकाने वाले एम्ब्रोस ने अपने करियर में 22 दफा 5 और 3 बार 10 विकेट लेने का कारनाम किया ​है. लगातार चोटो के चलते उन्होने 2000 में क्रिकेट से सन्यास ले लिया.


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