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5 बातें जिस वजह से विराट कोहली को कप्तानी से हटा देना चाहिए

 

साउथम्पटन टेस्ट में करारी हार के बाद विराट कोहली की कप्तानी को लेकर भी सवाल उठने लगे. इस सीरीज़ में विराट ने भले ही बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया हो, लेकिन बतौर कप्तान वे फेल साबित हुए है. खिलाड़ियो के चयन को लेकर उनकी समझ तो पहले मैच से ही निशाने पर रही है. सीरीज़ में हार बाद अब यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या कोहली को कप्तानी से मुक्त कर देना चाहिए. आइये जानते है 5 वजह.

खिलाड़ियो के चयन में गलती
टेस्ट सीरीज़ के पहले मैच से ही कोहली खिलाड़ियो के चयन को लेकर गलती करते आ रहें है. पहले टेस्ट में वे जहां एक अकेले स्पिनर अश्विन के साथ मैदान में  उतरे, तो वहीं दूसरे मैच में उमेश की जगह कुलदीप को खिलाना उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई. इसके बाद चौथे मैच में कोहली ने फिर गलती की, और जब अश्विन चोटिल थे तो उनकी जगह किसी दूसरे स्पिनर को मौका देने के बजाए उन्हे ही खिलान मुनासिब समझा.


कुछ खिलाड़ियो पर हद से ज्यादा भरोसा
वैसे तो कोहली हर मैच में टीम बदलते है, लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे भी हैं जिनके लगातार खराब प्रदर्शन के बावजूद भी टीम में मौका दिया जा रहा है. हार्दिक पांड्या इन्ही में से एक है, हार्दिक के टेस्ट खिलाड़ी होने को लेकर गावस्कर से लेकर होल्डिंग तक कई दिग्गज सवाल उठा चुके है. लेकिन उसके बाद भी कोहली उन्हे भरपूर मौका दे रहें है.


टीम में लगातार बदलाव
कोहली ने 39 टेस्ट में 38 मर्तबा टीम बदली है. टीम में खुद कोहली के अलावा एक भी ऐसा बल्लेबाज नहीं है जिसकी जगह सेट हो. लगातार अदला बदली के चलते कोई भी बल्लेबाज अपने स्थान पर सेट नहीं है पा रहा है. बल्लेबाजो के ऊपर अच्छा प्रदर्शन करने का एक मनौवैज्ञानिक सा दबाव रहता है.


मनमानी करते है कोहली
एक समय था जब भारतीय टीम के पास सचिन, द्रविड़, लक्ष्मण और गांगुली जैसे शानदार सीनियर बल्लेबाज होते थे. जिन की वजह से भारतीय टीम की बल्लेबाजी को दुनिया की सबसे मजबूत बल्लेबाजी माना जाता था, लेकिन मौजूदा समय में कोहली अपने अलावा किसी दूसरे को टिकने देना ही नहीं चाहते है. यही वजह है की पुजारा जैसे सीनियर खिला​ड़ी को भी टीम से बहार बैठना पड़ता है.
                                     
मैदान पर गुस्सा
गांगुली से लेकर धोनी तक ऐसे भारतीय कप्तान रहें है जो मैदान पर बेहद कूल नज़र आते थे. धोनी हमेशा दूसरे खिलाड़ियो पर भरोसा दिखाते और खुद नीचले क्रम में बल्लेबाजी करना पसंद करते. जबकि कोहली इसके उलट है वह मैदान पर अपने गुस्सैल स्वभाव के लिए जाने जाते है. कई बार उनके गुस्से के शिकार साथी खिलाड़ी होते है.

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