कैराना उपचुनाव : एक ही परिवार के दो प्रत्याशी आमने सामने, जानिये किसका पलड़ा ज्यादा भारी

उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट का उपचुनाव बेहद रोचक हो चला है. सपा—रालोद द्वारा तबस्सुम हसन को उम्मीदवार बनाये जाने के बाद बीजेपी ने मृगांका सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है. एक तरफ जहां मृगांका पूर्व सांसद हुकुम सिंह की बेटी है. तो वही दुसर तरफ तबस्सुम पूर्व सांसद मुनव्वर हसन की पत्नि. इस दोनो प्रत्याशी को लेकर खास बात यह है की हिन्दु और मुस्लिम होने के बावजूद दोनो एक ही बिरादरी और यहांं तक की एक ही परिवार से ताल्लुक रखती हैं.
कैराना लोकसभा सीट पर 28 मई को मतदान होना है. यह सीट भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई है. दोनो पार्टीयो के उम्मीदवार सामने आने के बाद तस्वीर बेहद साफ हो गई है. अब यह लड़ाई दो पार्टीयो की न होकर बल्कि दो परिवारो की हो गई है. इस सीट पर पिछले कई सालो से इन दोनो ही परिवारो का कब्जा रहा है.
एक ही परिवार से से है दोनो का नाता
हुकुम सिंह और मुनव्वर हसन दोनो ही गुर्जर बिरादरी से ताल्लुक रखते है. आपको जानकर हैरानी होगी की दोनो एक ही परिवार से है. दरअसल मुनव्वर हसन के पिता चौधरी अख्तर हसन 84 गांव के चौधरी बुन्दू के बेटे थे. चौधरी बुन्दू और बाबू हुकुम सिंह आपस मे सगे चचेरे भाई रहे. एक परिवार ने इस्लाम अपना लिया.दोनो कलस्यन खाप से हैं.
सबसे ज्यादा है गुर्जर वोट
कैराना एक गुर्जर बहुल इलाका है यहां गुर्जर वोट लगभग 4 लाख है जिसमें आधे मुस्लिम है. स्थानीय गुर्जरो में धर्म से अधिक जाति का प्रभाव रहा है. यहां अक्सर यह नारा भी दिया जाता है कि गुर्जर—गुर्जर एक समान हिन्दु हो या मुसलमान.
चुनावी टक्कर रही है बराबरी की
कैराना लोकसभा सीट से 2014 हुकुम सिंह ने नाहिद हसन को हराया था. लेकिन 2017 के विसचुनाव में नाहिद हसन ने मृगांका सिंह को हराकर हिसाब बराबर कर लिया था. स्थानीय लोगो के अनुसार दोनो ही पक्ष मजबूत माने जा रहे है. क्यूकिं अगर मृगांका के साथ लोगो की हमदर्दी है की उन्होने अपने पिता को खोया है. तो तबस्सुम भी अपने पति को खो चुकी है. पिछले ही दिनो तब्बसुम के ससुर अख्तर हसन का इंतेकाल हो गया. वो भी कैराना सीट से सांसद रह चुके है. ऐसे में सिर्फ सहानभूति की राजनिति करके कैराना फतेह करना दोनो ही पार्टीयो के लिये बेहद मुश्किल होगा.
स्त्रोत — टू सर्किल डॉटनेट और नवजीवन
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