जब अलाउद्दीन खिलजी ने 8 हजार क्रूर आक्रमणकारी मंगोलो के सर कलम कर की देश की रक्षा
फिल्म पद्मवाती रिलिजिंग से पहले ही विवादो में है । फिल्म चित्तौड़ के राजा राणा रतन सिंह उनकी पत्नी पद्मावती और दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी पर आधारित है । बॉलीवुड की फिल्म ‘पद्मावती’ के मद्देनजर अलाउद्दीन खिलजी के बारे में काफी विवाद है, जिसमें उन्होंने 1303 में खिलजी की विजय को और चित्तोर के रानी पद्मिनी के साथ उनके जबरदस्त जुनून का वर्णन किया गया है।
जानिये कौन था अलाउद्दीन खिलजी
अलाउद्दीन खिलजी वास्तविक नाम अली गुरशास्प 22 अक्टूबर 1296 से 2 जनवरी 1316 तक दिल्ली की सलतनत का खिलजी वंश का दुसरा सुल्तान था । अलाउद्दीन एक शासक के साथ साथ एक विजेता भी था , उसका सम्राज्य दक्षिण में मदुरै तक फैला दिया था। इसके बाद इतना बड़ा भारतीय साम्राज्य अगले तीन सौ सालों तक कोई भी शासक स्थापित नहीं कर पाया था।
जब आठ हजार मंगोलियो के सर कलम कर चुनवा दिये थे
अलाउद्दीन खिलजी ने भारत की रक्षा के लिये दुनिया के सबसे क्रूरतम लड़ाके मंगोलो से भी युद्ध किया था । मंगोले ने भारत पर 5 बार आक्रमण किया और सभी बार उन्हे शिकस्त का सामना करना पड़ा । मंगोलो के लगातार आक्रमण से गुस्साएं अलाउद्दीन खिलजी ने 8000 मंगोलो के सर कटवाकर दिल्ली के सीरी फोर्ट में चुनवा दिये थे ।
कौन थे मंगोल
चीन के गोबी के जंगलो में रहने वाले मंगोल बेहद ही क्रूर माने जाते थे । कहा जाता है की वह जिंदा इंसान को 3 मिनट में ही खा जाते थे । चंगेज़ खान के नेतृत्व में आकर तो यह बेहद खूंखार हो गये थे , इनका मकसद पूरी दुनिया का धर्म और सांस्कृति नष्ट करना था । ये जहां भी जाते वहां आधे से ज्यादा लोगो को मार देते थे और महिलाऔ से जबर्दस्ती रिलेशन बनाते थे जिससे पूरी जनरेशन ही चेंज हो जाती थी । मंगोले के नेता का नारा था हम हारे या जीते अपना जीन जरूर छोड़ेगें ।
कहते है मंगोलो ने 1258 में बगदाद पर विजय प्राप्त की थी, तब उन्होंने पूरे शहर को बुरी तरह तबाह बर्बाद कर दिय था। उन्होंने अब्बासीद साम्राज्य के सभी महान पुस्तकालयों को नष्ट कर दिया (यह कहा जाता है कि नदियों स्याही से से काली हो गई थी क्योंकि उन्होंने किताबों को आग लगा कर नदी में फेक दिया था), और कहा जाता है की युफ्रेट्स और टाइग्रिज़ में हफ़्तों तक सड़कों पर खून की नदियां बहती रही थी । मंगोलों के आक्रमण करने के बाद इसी तरह की बात रूस के साथ हुई । यह माना जाता है कि रूस के विकास को मंगोल के अकर्मण ने 200 साल पीछे कर दिया।
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