कैराना उपचुनाव : सपा बसपा गठजोड़ से बने ये आकंड़े बढा सकते है भाजपा की मुसीबते
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट गवांने के बाद भारतीय जनता पार्टी के लिये अब कैराना सीट साख का सवाल बन गई है. वहीं दूसरी तरफ यह सीट सपा बसपा की मोर्चाबंदी का दुसरा ट्रायल भी है. इस सीट के लिये मतदान 28 मई को होना है और मतगणना 31 मई को होगी.
एक तरफ जहां गोरखपुर और फूलपुर में मिली हार का बदला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कैराना सीट जीतकर जरूर लेना चाहेंगे. तो दुसरी अखिलेश यादव और मायावती अपनी जीत के सिलसिले को बनाये रखना चाहेंगे. बरहाल कैराना सीट किसकी होगी ये तो वक्त ही बतायेगा लेकिन कुछ समीकरण जरूर मुस्तकबिल तय करते नजर आ रहें है.
वोटो का समीकरण
चूकिं भारतीय जनता पार्टी हिन्दु वोट की राजनिति के सहारे अपना परचम लहरा रही है. ऐसे में वह कैराना में भी इन्ही बिसातो पर खेलना चाहेगी. कैराना लोकसभा सीट पर कुल 17 लाख मतदाता हैं जिनमें लगभग 5 लाख मुस्लिम, 4 लाख बैकवर्ड (जाट, गुर्जर, सैनी, कश्यप, प्रजापति और अन्य शामिल) और तकरीबन डेढ लाख वोट जाटव दलित है. ऐसे में जब सपा और बसपा एक जगह मिल जाते है तो यकीनन भाजपा के लिये चिंता का विषय है.
बात करें अगर 2014 की तो इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह को 5.65 लाख वोट मिले थे जबकि सपा और बसपा के उम्मीदवारों को 3.29 लाख और 1.60 लाख वोट मिले थे. यानी की दोनो पार्टीयो का टोटल भी भाजपा उम्मीदवार से कम था. लेकिन मौजूदा समय में स्थिति कुछ और नजर आ रही है.
इंडियन एक्सप्रेस की गणना के मुताबिक साल 2017 में अगर सपा-बसपा को मिले वोट देखे जाएं और उसके हिसाब से 2019 का अंदाज़ा लगाया जाए तो सपा-बसपा की दोस्ती, भाजपा पर भारी पड़ती नजर आ रही है. यूपी की 80 सीटो में से 57 पर सपा बसपा का कब्जा रहेगा जबकि एनडीए के पास सिर्फ़ 23 बचेंगी.
स्त्रोत—बीबीसी, इनटुडे

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